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शेखर से शिखर तक:झारखंड निर्माताओं में से एक सूर्य सिंह बेसरा की संघर्ष गाथा |

रांची : झारखंड राज्य निर्माताओं में से एक सूर्य सिंह बेसरा की संघर्ष गाथा, आज रांची विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट ऑडिटोरियम में उनके संघर्षों को वक्ताओं द्वारा रखा गया कि, कैसे झारखंड की लड़ाई लड़ी कैसे झारखंड अलग राज्य बना कैसे झारखंड स्टूडेंट यूनियन 72 घंटा झारखंड बंदी किया था | इन सभी को मंचों के माध्यम से रखा गया सूर्य सिंह बेसरा सभी वक्ताओं के बातों को गौर से सुन रहे थे ,उन्होंने जब अपना बात रखा, तब परम मित्र शैलेंद्र महतो, प्रभाकर तिर्की और कई ऐसे हस्ती हैं जिनका नाम उन्होंने लिया और उनके साथ बिताए हुए संघर्ष किए हुए पलों को याद किया |

श्री बेसरा : “राम दयाल मुंडा मुझे सुरजू कह कर बुलाते थे,B P केशरी मुझे सूरज कह कर बुलाते थे ,मैं संघर्ष भी किया परिवार भी बसाया ,लेकिन इसी बीच कई लोग छूट गए ,सैलेन्द्र महतो को जितना उनकी पत्नी नहीं जानती उतना मैं जानता  हूँ,और मुझे भी सैलेन्द्र उतना ही जानता है,उन्होंने सोले फिल्म का उदाहरण देते हुए अपने मित्र को याद किया” |

सुनने वाले मंत्र मुक्त होकर सुन रहे थे ,क्योंकि झारखंड ऐसे ही नहीं मिला है इसके लिए नौजवानों ने अपना गोल्डन टाइम को बलिदान दिया है कई ऐसे महान महापुरुष रहे हैं जो अपना जीवन का बलिदान दिया है उन सभी को याद किया गया और आज झारखंड आंदोलनकारी में से एक सूर्य सिंह बेसरा को खास करके उनके संघर्ष गाथा को दोहराया गया। मौके पर उपस्थित थे शैलेंद्र महतो प्रभाकर तिर्की, प्रभात खबर के पूर्व संपादक अनुज सिंह,और उनके कई साथी मौजूद रहे।
मुख्य अतिथि के रूप में रांची के सांसद संजय सेठ उपस्थित रहे।

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