झारखंड : आदिवासी समुदाय पूरे पौष माह में पूर्वजों को जहां दफनाया गया है,वहाँ पर उनके वनसँजो द्वारा पूजा किया किया जाता है,वहाँ पर उनके पसंदीदा चीजों को अर्पित किया जाता है,इस महीने में कोई भी शुभ काम वर्जित है | इस पूजा विधि में उरद डाल,दुंबु पीठा,चावल को एक सीझ,हँडिया और खैनी जैसे वस्तु को अर्पित किया जाता है | इसको बड़का शादी भी बोला जाता है,क्योंकि शादी विवाह के जैसा परंपरा को निभाया जाता है,ढोल नगाड़े के साथ उनके मसना स्थल तक जाता है |
“कांके क्षेत्र अंतर्गत बोडेया गांव में हरगडी़,मसना पूजा किया गया बोडेया गांव के पहान विश्वकर्मा पहान की अगुवाई में सैकड़ो की संख्या में महिला पुरुष गांव के अखाड़े में एकजुट होकर ढोल मांदर नगाड़ा के साथ मसना स्थल तक गए |
मसना स्थल की साफ सफाई कर पूर्वजों को उड़द दाल भात खैनी चुना हडिया बरी आलु डुंबू फूल माला आदि अर्पित कर पूर्वजों को याद किया गया| एवं आशीर्वाद लिया मौके पर केंद्रीय सरना समिति केंद्रीय अध्यक्ष श्री फूलचंद तिर्की उपस्थित हुए हरगड़ी” पूजा मसना पूजा आदिवासियों की रूढ़िवादी परंपरा संस्कृति है| पूस के महीने में आदिवासी अपने पूर्वजों को सामूहिक रूप से याद करते हैं, यह त्यौहार पूरे पुस महीने तक विभिन्न गांव मौजा में चलेगा मौके पर बोडेया पंचायत के सरपंच अमर तिर्की ग्राम प्रधान अनिल उरांव दालु पहान रवि बिन्हा रविंद्र बिन्हा नीरज बांडो सुशील उरांव किसुन गाड़ी आशीष टोप्पो निर्मल लकड़ा अमित टोप्पो अविनाश रवि टोप्पो अजीत लकड़ा दीपक टोप्पो एवं अन्य उपस्थित थे|






