सूर्य सिंह बेसरा को जान की खतरा |
ख़ुफ़िया सूत्रओ के हवाले से सर्तक रहने को कहा गया है
जनवरी 2025 में झारखंड सरकार के गृह सचिव की ओर से जमशेदपुर के पुलिस अधीक्षक को अंगरक्षक देने की आदेश दिया गया है
सूर्य सिंह बेसरा अभी भुवनेश्वर में है|
खबर झारखंड : झारखंड राज्य निर्माताओं में से एक एक मात्र त्यागी विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर एक सनसनी खेज रहस्य का खुलासा किया है। सूर्य सिंह बेसरा 15, 16, 17 दिसम्बर को ओडिशा राज्य के भुवनेश्वर गए हुए थे। श्री बेसरा के गुरु रहे, नयन चांद हेंब्रम, जो “भारतीय आदिम जाति सेवक संघ” नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, साथ ही वे “अखिल भारतीय माहली आदिवासी समाज” के पुरोधा रहे नयन चांद हेंब्रम की आकस्मिक निधन विगत 7 दिसम्बर 2025 को भुवनेश्वर स्थित एक अस्पताल में हो गया था। उनका श्राद्ध कर्म भुवनेश्वर में 16 और 17 दिसम्बर को सम्पन्न हुआ। उसी श्राद्ध कर्मों में शामिल होने के लिए सूर्य सिंह बेसरा शामिल हुए थे। उसी श्राद्ध कर्मों में अपरिचित सेवानिवृत खुफिया के व्यक्तियों से परिचीत हुए।
एक दूसरों की परिचय और बात चीत के दरमियान एक सनसनीखेज रहस्यमय साज़िश का खुलासा हुआ है। ख़ुफ़िया विभाग के पूर्व पदाधिकारी दिल्ली, ओडिशा, और पश्चिम बंगाल से श्राद्ध कर्म में शरीक हुए थे। उनलोगों से बात चीत के दरमियान सूर्य सिंह बेसरा ने अपना परिचय देते हुए कहा…. मैं सूर्य सिंह बेसरा, ऑल झारखंड स्टुडेंट्स यूनियन (आजसू) एवं झारखंड पीपुल्स पार्टी (JPP) के संस्थापक हूं। मेरे नेतृत्व में 1989 में आजसू द्वारा 72 घंटे झारखंड बंद के परिणामस्वरूप तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के प्रधानमंत्रीतत्व कल मैं झारखंड आंदोलन के इतिहास में पहली बार झारखंड अलग राज्य के मुद्दे पर भारत सरकार और आजसू के बीच दिल्ली में “झारखंड वार्ता ” संपन्न हुई थी।
1990 में मैं अविभाजित बिहार के घाटशिला विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए थे। 1991 में बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव में कहा था “मेरी लाश पर झारखंड बनेगा ” उसी के प्रतिवाद में एक वर्ष पांच के अंदर मैने विधायक पद से त्याग पत्र दिया था। मैं झारखंड राज्य निर्माताओं में से एक हैं, साथ ही ” गीतांजलि और मधुशाला” के संताली अनुवाद के लिए साहित्य अकादेमी नई दिल्ली द्वारा 2017 में सर्वोच्च साहित्य सम्मान से पुरस्कृत किया गया है। सूर्य सिंह बेसरा ने कहा है कि उन्हें 1990 से ही अंगरक्षक सुरक्षा गारंटी हेतु प्रतिनियुक्ति किया गया है, परन्तु बिना कारण बताए उनसे आंग रक्षक हटा दिए गए हैं। इस विषय पर जमशेदपुर के पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक तथा मुख्यमंत्री से लेकर गृह सचिव तक पत्राचार किए। अंत में झारखंड के गृह सचिव ने जमशेदपुर के पुलिस अधीक्षक को जनवरी 2025 में एक आदेश पत्र जारी कर पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा को अविलंब एक अंग रक्षक प्रतिनियुक्त करने का निर्देश दे हैं। इसके वावयुद एक वर्ष बीत जाने पर भी उन्हें अंग रक्षक नहीं दिए गए है। आपको बताते चलें कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष शहीद निर्मल महतो की हत्या 8 अगस्त 1987 तथा 4 मार्च 2007 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के जमशेदपुर सांसद सुनील कुमार महतो को राजनीतिक साजिश के तहत हत्याकांड का अंजाम दिया गया था।
सूर्य सिंह बेसरा झारखंड राज्य निर्माताओं में से एक ही नहीं, बल्कि वे एक राजनीतिज्ञों ही नहीं बल्कि संविधान विशेषज्ञ भी, जो नीतिगत रूप से झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार के घोर आलोचक रहे हैं। ख़ुफ़िया तंत्रों ने पूर्ववर्ती घटनाओं के मद्दे नज़र श्री बेसरा को सतर्क रहने को कहा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा सूर्य सिंह बेसरा को अपने एक प्रतिद्वंदी ही नहीं बल्कि राजनीतिक दुश्मन भी मानती है। इस लिए हमेशा सावधान रहना चाहिए। झारखंड मुक्ति मोर्चा हत्या की साज़िश रच सकती हैं। बिना अंग रक्षक का क्षेत्र में दौरा करना खतरे की घंटी है। श्री बेसरा ने कहा है कि वे अंग रक्षक के बिना असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। सूर्य सिंह बेसरा 18 दिसम्बर को भुवनेश्वर से जमशेदपुर वापस लौट रहे हैं और वे 19 दिसम्बर को इस विषय पर जमशेदपुर के पुलिस अधीक्षक से 11 बजे दिन को मिलेंगे।






