रांची : झारखंड प्रशिक्षित शिक्षक संघ के छात्र नेता सह प्रदेश अध्यक्ष की ओर से राज्यसभा सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष श्री आदित्य साहू जी द्वारा भाषा एवं झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) के संबंध में माननीय मुख्यमंत्री जी को लिखे गए पत्र पर अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है
| संघ की ओर से कहा गया कि झारखंड की सांस्कृतिक एवं भाषाई विविधता इस राज्य की पहचान और आत्मा है। हम देश की सभी भाषाओं एवं बोलियों का सम्मान करते हैं तथा भारत की बहुभाषी परंपरा को अपनी साझा विरासत मानते हैं। किंतु 9 वर्षों से लंबित JTET परीक्षा के संदर्भ में उठाई जा रही ऐसी मांगें, जो झारखंड की भाषाई मौलिकता एवं सांस्कृतिक स्वरूप को प्रभावित करती हों, स्वीकार्य नहीं हो सकतीं।
प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया कि झारखंड की अपनी नौ क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाएँ — संथाली, मुंडारी, हो, खड़िया, कुड़ुख, नागपुरी, कुरमाली, खोरठा एवं पंचपरगनिया — यहाँ की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पहचान का मूल आधार हैं। राज्य में नियुक्तियों एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में इन भाषाओं को प्राथमिक आधार बनाए जाने की लड़ाई झारखंडवासियों द्वारा लंबे संघर्ष के बाद हासिल की गई है।
संघ ने कहा कि प्रत्येक राज्य की अपनी भाषा और संस्कृति होती है तथा वहाँ निवास करने वाले लोगों को स्थानीय भाषा एवं सांस्कृतिक परिवेश के साथ समन्वय स्थापित करना पड़ता है। उदाहरणस्वरूप, महाराष्ट्र में निवास करने वाले अन्य राज्यों के लोग मराठी भाषा को अपनाते हैं और स्थानीय व्यवस्था के अनुरूप स्वयं को ढालते हैं। इसी प्रकार देश के विभिन्न राज्यों—कर्नाटक, तमिलनाडु, पंजाब, तेलंगाना, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात, ओडिशा, असम एवं आंध्र प्रदेश—में स्थानीय भाषाओं को शिक्षा एवं सरकारी नियुक्तियों में अनिवार्य अथवा प्राथमिकता दी गई है।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया कि देशभर में सरकारी नियुक्तियों के लिए स्थानीय भाषा की दक्षता एक सामान्य व्यवस्था है। तमिलनाडु में तमिल, कर्नाटक में कन्नड़, असम में असमिया, महाराष्ट्र में मराठी, पंजाब में पंजाबी सहित अन्य राज्यों में भी स्थानीय भाषाओं को अनिवार्य महत्व दिया जाता है। ऐसे में झारखंड में भी स्थानीय एवं जनजातीय भाषाओं को ही JTET परीक्षा एवं नियुक्ति प्रक्रिया का आधार बनाए रखना न्यायसंगत एवं संवैधानिक भावना के अनुरूप है।
संघ ने पुनः दोहराया कि सभी भाषाओं का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन झारखंड की नौ क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं के अधिकारों से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। किसी भी प्रकार का भाषाई अतिक्रमण राज्य की मौलिक पहचान पर प्रहार करेगा तथा सामाजिक संतुलन को प्रभावित करेगा।
अंत में झारखंड प्रशिक्षित शिक्षक संघ ने राज्य सरकार से मांग की कि 9 वर्षों से लंबित JTET परीक्षा की नियमावली एवं सिलेबस को शीघ्र अंतिम रूप देकर परीक्षा का आयोजन कराया जाए, ताकि राज्य के लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
जारीकर्ता
चंदन कुमार






