करम पर्व प्रकृति, संस्कृति और भाई-बहन के अटूट प्रेम का उत्सव : डॉ. रामेश्वर उरांव
मांदर की थाप और करम गीतों में झलकती है झारखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति : आलोक कुमार दूबे
करम पर्व हमारी परंपरा, प्रकृति और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक : लाल किशोर नाथ शाहदेव
जावा की हरियाली और करम पूजा में रची-बसी है झारखंड की सांस्कृतिक पहचान : डॉ. राजेश गुप्ता
करम पर्व पर लोक-संस्कृति और परंपराओं को सहेजने का संकल्प लें : कांग्रेस नेताओं की अपील
रांची। करम पर्व के अवसर पर लोहरदगा विधायक एवं कांग्रेस नेता डॉ. रामेश्वर उरांव,प्रदेश कांग्रेस कमिटी महासचिव आलोक कुमार दूबे,लाल किशोर नाथ शाहदेव, डॉ राजेश गुप्ता ने झारखंडवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
इस मौके पर डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि करम पर्व झारखंड की समृद्ध आदिवासी एवं लोक-संस्कृति की पहचान है। प्रकृति की पूजा, करम देव की आराधना और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते से जुड़ा यह पर्व समाज में सुख, समृद्धि और आपसी सद्भाव का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और लोक विरासत को सहेजना हम सभी का दायित्व है। बरियातू स्थित आवास पर डॉ रामेश्वर उरांव अपने परिवार जनों के साथ एवं कांग्रेस नेताओं के साथ करम राजा की पूजा अर्चना की।
प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने करम पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जब मांदर की थाप गूंजती है और कदम से कदम मिलाकर गांव-समाज झूम उठता है, तब झारखंड की लोक-संस्कृति की वास्तविक मिठास महसूस होती है। उन्होंने कहा कि करम पर्व हमारी मिट्टी, हमारी परंपरा और हमारी सामूहिक जीवनशैली से गहराई से जुड़ा हुआ है। जावा की हरियाली और करम पूजा हमें प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देती है। उन्होंने सभी से अपनी लोक-संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की अपील की।
लाल किशोर नाथ सहदेव ने करम पर्व पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि करम केवल पूजा और उत्सव का पर्व नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बहनों द्वारा भाइयों के सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना, करम देव की पूजा तथा पारंपरिक गीत-संगीत हमारी संस्कृति की खूबसूरती को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में भी हमें अपनी परंपराओं की मूल भावना को जीवित रखते हुए नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना चाहिए।
डॉ. राजेश गुप्ता ने करम पर्व की बधाई देते हुए कहा कि करम पर्व प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंध को दर्शाता है। करम देव की पूजा और जावा की हरियाली के माध्यम से प्रकृति के प्रति श्रद्धा एवं संरक्षण की भावना मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि यह पर्व भाई-बहन के प्रेम, परिवार की खुशहाली और समाज की एकजुटता का भी प्रतीक है। उन्होंने कामना की कि करम देव की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आए तथा झारखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति और परंपराएं सदैव जीवंत रहें।





