रांची। प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के विरुद्ध उत्तराखंड के हल्द्वानी में दर्ज प्राथमिकी को दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई करार दिया है। उन्होंने कहा कि जिस घटना को लेकर राहुल गांधी ने सामाजिक भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता के खिलाफ आवाज उठाई तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग की, उसी मामले में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद कथित रूप से रामलीला मैदान के शुद्धिकरण और हवन का मामला सामने आया था। राहुल गांधी ने इसी घटना पर सवाल उठाते हुए कहा था कि सार्वजनिक जीवन में जातिगत भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि “विडंबना देखिए कि जिस व्यक्ति ने छुआछूत और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई, उसी की आवाज दबाने के लिए SC/ST Act सहित गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कर दी गई। यह केवल राहुल गांधी का मामला नहीं है, बल्कि देश में सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले हर व्यक्ति के लिए चिंता का विषय है।”
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि हल्द्वानी की घटना को अंजाम देने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ अविलंब प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है और यदि किसी सार्वजनिक स्थल पर जातिगत भेदभाव या छुआछूत की मानसिकता प्रदर्शित करने वाली घटना हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि “जिस घटना के खिलाफ राहुल गांधी ने आवाज उठाई, उस घटना को अंजाम देने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय राहुल गांधी पर ही FIR दर्ज करना न्याय का मजाक है। पहले घटना को अंजाम देने वालों पर प्राथमिकी दर्ज हो, उसके बाद यदि राहुल गांधी के बयान में कोई कानूनी अपराध बनता है तो कानून अपना काम करे।”
प्रदेश कांग्रेस महासचिव ने कहा कि FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध होना नहीं है, लेकिन जिस तरह घटनाक्रम सामने आया है, उससे प्राथमिकी की मंशा और समय दोनों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। विपक्ष के नेता को राजनीतिक बहस का जवाब राजनीतिक और वैचारिक स्तर पर दिया जाना चाहिए, मुकदमों और पुलिस कार्रवाई के जरिए नहीं।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यदि हल्द्वानी की घटना में शुद्धिकरण किया गया था तो उस पर सवाल उठाना अपराध कैसे हो गया? क्या सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाना अब अपराध माना जाएगा? क्या संविधान में मिले समानता के अधिकार की बात करना भी FIR का आधार बनेगा?
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार संविधान, सामाजिक न्याय, समानता और वंचित वर्गों के अधिकारों की बात कर रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ मुकदमों और प्राथमिकी का इस्तेमाल विपक्ष की आवाज को कमजोर करने की कोशिश के रूप में किया जाना लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि “देश की जनता सब देख रही है। मुकदमों से राहुल गांधी की आवाज नहीं दबेगी और न ही संविधान तथा सामाजिक न्याय की लड़ाई रुकेगी। हल्द्वानी की घटना को अंजाम देने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं पर तत्काल FIR दर्ज हो और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो—यही कानून और न्याय की मांग है।





