जेपीएससी के पुराने मामलों की सीबीआई जांच अब तक पूरी नहीं, न्यायालय के समक्ष सभी तथ्य रहेंगे
रांची। प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने को भाजपा अपनी राजनीतिक जीत बताकर छात्रों और युवाओं को गुमराह करने की कोशिश न करे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य दोनों पक्षों को नोटिस दिया है, इसलिए भाजपा को इतना उतावला होने की जरूरत नहीं है। न्यायालय की प्रक्रिया को राजनीतिक हथियार बनाने से भाजपा बाज आए।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का नोटिस किसी पक्ष को दोषी ठहराने का फैसला नहीं है। न्यायालय में मामला विचाराधीन है और अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। भाजपा नेताओं को न्यायालय की कार्यवाही को अपनी सुविधा के अनुसार राजनीतिक रंग देने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज झारखंड हाईकोर्ट में जेपीएससी की दो परीक्षाओं से जुड़े मामले में भी सरकार का पक्ष जारी रहा है। वहीं दूसरे और तीसरे जेपीएससी से जुड़े मामलों की सीबीआई जांच भी अभी तक पूरी नहीं हुई है। इन मामलों की जांच की स्थिति और उससे जुड़े तमाम तथ्य निश्चित रूप से माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष भी रहेंगे। ऐसे में भाजपा द्वारा अभी से किसी निष्कर्ष पर पहुंच जाना केवल राजनीतिक जल्दबाजी है।
प्रदेश कांग्रेस महासचिव ने कहा कि भाजपा नेता पहले यह बताएं कि जब केंद्र में पिछले 12 वर्षों से भाजपा की सरकार है, तब देशभर में भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे गंभीर सवालों पर केंद्र सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए? युवाओं के भविष्य की इतनी ही चिंता है तो केंद्र के अधीन होने वाली भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों में सामने आई गड़बड़ियों पर भी भाजपा को जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार छात्रों और युवाओं के हितों को लेकर गंभीर है। राज्य सरकार ने छात्रों की मांगों पर संवाद और समाधान का रास्ता अपनाया है। जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़े मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया अपने स्तर पर चल रही है। किसी भी परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।
आलोक कुमार दूबे ने आदित्य साहू द्वारा राहुल गांधी और हेमंत सोरेन पर लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि राहुल गांधी लगातार देश के छात्रों, युवाओं और बेरोजगारों की आवाज मजबूती से उठाते रहे हैं। भाजपा को राहुल गांधी पर आरोप लगाने से पहले अपने शासनकाल में युवाओं से किए गए वादों का हिसाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश भाजपा बंद करे। कांग्रेस छात्रों के अधिकार, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और निष्पक्ष जांच के पक्ष में मजबूती से खड़ी है। लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी घोषित कर देना और न्यायालय की प्रक्रिया को राजनीतिक भाषणों का विषय बना देना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
भाजपा के 2029 में सरकार बनाने और पहली कैबिनेट में सभी मामलों की सीबीआई जांच की अनुशंसा करने के दावे पर तंज कसते हुए आलोक कुमार दूबे ने कहा कि भाजपा पहले 2029 के सपने देखने से पहले आज युवाओं के सवालों का जवाब दे। पांच साल बाद की काल्पनिक कैबिनेट के फैसलों से वर्तमान की राजनीतिक और नैतिक जिम्मेदारी से भाजपा नहीं बच सकती।
उन्होंने कहा, “भाजपा को सुप्रीम कोर्ट के नोटिस पर जश्न मनाने या उतावला होने की बजाय न्यायालय की पूरी प्रक्रिया का इंतजार करना चाहिए। केंद्र और राज्य दोनों को नोटिस मिला है, जेपीएससी के पुराने मामलों की सीबीआई जांच अभी पूरी नहीं हुई है और आज हाईकोर्ट में भी संबंधित मामलों की सुनवाई जारी है। इन सभी तथ्यों को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा। इसलिए भाजपा न्यायालय के नाम पर राजनीति और भ्रम फैलाना बंद करे।”
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि कांग्रेस की लड़ाई किसी व्यक्ति या दल के खिलाफ नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य, पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया और न्याय के लिए है। यदि कहीं अनियमितता साबित होती है तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन अंतिम फैसला जांच और न्यायालय को करने दिया जाना चाहिए। भाजपा नेताओं को न्यायालय से पहले फैसला सुनाने की आदत छोड़नी होगी।






